आजकल भारत में एक नई राजनीतिक पार्टी काफी चर्चा में है। सोशल मीडिया पर उसका ट्रेंड तेज़ी से बढ़ रहा है और उसका सबसे बड़ा मुद्दा है — बेरोज़गारी।
लेकिन मेरा व्यक्तिगत मानना है कि सिर्फ इसी एक मुद्दे के सहारे कोई पार्टी लंबे समय तक नहीं टिक सकती।
क्योंकि असली सवाल सिर्फ “बेरोज़गारी” नहीं है, बल्कि “स्किल की कमी” भी है।
आज अगर हम ध्यान से देखें तो जो लोग पढ़े-लिखे नहीं हैं, उनमें बेरोज़गारी उतनी ज़्यादा नहीं दिखती। वो लोग किसी न किसी काम में लगे रहते हैं। असली समस्या वहाँ दिखाई देती है जहाँ लोगों के पास डिग्री तो है, लेकिन स्किल नहीं है।
बहुत से लोग सिर्फ डिग्री लेने तक सीमित रह गए। किसी तरह परीक्षा पास कर ली, कहीं पैसे देकर नंबर ले लिए, लेकिन जब असली इंटरव्यू देने की बारी आती है तो वहाँ स्किल चाहिए होती है। प्राइवेट कंपनियाँ सिर्फ कागज़ नहीं देखतीं, उन्हें काम करने वाला इंसान चाहिए।
सरकार भी हर किसी को सरकारी नौकरी नहीं दे सकती। जितनी पोस्ट होंगी, उतने ही लोगों को नौकरी मिलेगी। 100 करोड़ लोगों को सरकारी नौकरी देना संभव नहीं है। इसलिए आज के समय में सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि स्किल सबसे ज़रूरी चीज़ बन चुकी है।
मैं अपनी बात करूँ तो मैं freelancing करता हूँ। मुझे किसी एक जगह बैठकर काम करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। मैं कहीं से भी client ले सकता हूँ और ले रहा हूँ। कई बार अलग-अलग कंपनियों से referral के लिए calls भी आते हैं। इसका मतलब साफ है — market में skill की demand है, लेकिन skilled लोग कम हैं।
अगर कोई आज Noida, Gurgaon या किसी भी बड़े शहर में जाए, तो उसे बहुत सी कंपनियों में vacancies मिल जाएँगी। लेकिन असली चुनौती interview clear करने की है।
अब अगर उस नई पार्टी की बात करें, तो शुरुआत में मुझे लगा था कि शायद ये कुछ अलग करेगी। लेकिन धीरे-धीरे ऐसा लगने लगा कि ये भी बाकी पार्टियों की तरह सिर्फ दूसरी पार्टियों को नीचे दिखाने वाली राजनीति में फँसती जा रही है।
सोशल मीडिया पर लगातार किसी को target करना, हर समय दूसरे नेताओं पर meme या तंज़ वाले पोस्ट डालना — इससे कुछ समय तक attention मिल सकती है, लेकिन लंबे समय तक भरोसा नहीं बनता।
लोग सिर्फ ये नहीं देखना चाहते कि सामने वाली पार्टी गलत क्या कर रही है। लोग ये भी देखना चाहते हैं कि आप खुद क्या करना चाहते हो और देश के लिए आपका clear vision क्या है।
अगर कोई पार्टी सिर्फ विरोध और trolling तक सीमित रह जाए, तो धीरे-धीेरे वो एक serious political party कम और meme page ज़्यादा लगने लगती है।
ये मेरा सिर्फ personal point of view है। हो सकता है कुछ लोग इससे सहमत हों और कुछ नहीं। लेकिन मेरे हिसाब से आने वाले समय में वही लोग और वही पार्टियाँ आगे बढ़ेंगी जो skill, development और practical solutions पर काम करेंगी — सिर्फ नारों और विरोध की राजनीति पर नहीं।
